प्रदेश | लगभग एक हफ्ते की ठंड के बाद पिछले एक सप्ताह से अचानक गर्म हुए मौसम ने राजधानी समेत प्रदेश के लगभग हर घर में किसी न किसी सदस्य को सर्दी-खांसी और बुखार से पीड़ित कर दिया है। डाक्टरों के मुताबिक अंबेडकर अस्पताल की ओपीडी से लेकर निजी अस्पतालों में भी ऐसे लोग बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं या डाक्टरों को फोन पर कोरोना से मिलते-जुलते लक्षण बता रहे हैं और इस वजह से घबराहट भी है।
भास्कर ने अचानक फैले सर्दी-बुखार को लेकर राजधानी के विशेषज्ञ डाक्टरों से बात की तो उनका कहना है कि ठंड की शुरुआत से इसके बढ़ने तक लगभग 90% आबादी को सर्दी-जुकाम या बुखार जैसा संक्रमण होता रहा है। इसके वायरस सक्रिय हैं और फ्लू का ठंड से इलाज न हो तो यह बैक्टीरियल निमोनिया में कन्वर्ट हो सकता है। यही नहीं, निमोनिया के बैक्टीरिया भी एक्टिव हैं और कोरोना भी फेफड़ों पर असर करता है, इसलिए इस वक्त सभी के लिए वह सभी सावधानियां जरूरी हैं जो कोरोना काल में अपनाई गई थीं। डाक्टरों के मुताबिक ठंड के दौरान फ्लू, राइनो वायरस सक्रिय रहता है, जो फ्लू के लिए जिम्मेदार है।
वहीं नीमो कोकल व स्टेप्टो कोकस बैक्टीरिया से निमाेनिया होता है। फ्लू के इलाज में लापरवाही बरती गई तो यही गंभीर हो सकता है। दरअसल ठंड के मौसम में सामान्य फ्लू या कोरोना में ज्यादा अंतर नहीं है। फ्लू में सर्दी, खांसी व बुखार होता है और यही काेरोना के सबसे प्राथमिक लक्षण हैं। इसलिए इसका तत्काल इलाज जरूरी है। निमोनिया व कोरोना फेफड़े का संक्रमित कर देता है। इसमें पानी भर जाता है, जिससे फेफड़े ठीक से काम नहीं करता और मरीज को सांस लेने में दिक्कत होती है। इस समय पैरासाइट से भी लोगों के बीमार पड़ने की आशंका रहती है। जैसे मलेरिया, पेट के कीड़े के कारण लोग बीमार पड़ सकते हैं।
फ्लू के साथ-साथ कोरोना से भी बचाव
- अब हर जगह मास्क जरूरी है।
- फ्लू होने पर डॉक्टर को दिखाएं।
- आइस्क्रीम खाने से बचें।
- फ्रिज से तुरंत कुछ खाने से बचें।
- विटामिन व प्रोटीनयुक्त खाएं।
- घरों की खिड़की खुली रखें, मच्छरों को घरों में आने से रोकें।
- एक-दूसरे का तौलिया या रूमाल उपयोग बिलकुल न करें।
- सेनेटाइजर का उपयोग कर लें।
(सीनियर फिजिशियन डॉ. अब्बास नकवी व डॉ. सुरेश चंद्रवंशी के अनुसार)
जुकाम में लक्षण ज्यादा हों तो करवा लें कोरोना जांच
ठंड के कारण फ्लू मरीजों की संख्या बढ़ गई है। अंबेडकर अस्पताल के मेडिसिन, चेस्ट व पीडियाट्रिक विभाग के अलावा निजी अस्पतालों में रोजाना 100 से ज्यादा मरीज आ रहे हैं। सीनियर कैंसर सर्जन डॉ. युसूफ मेमन व हिमेटोलॉजिस्ट डॉ. विकास गोयल के अनुसार बड़ों से लेकर बच्चों तक को वायरल फीवर या तेज जुकाम है। हल्की हरारत के साथ-साथ कमजोरी भी बता रहे हैं और कई को खांसी भी है।
बच्चों को फ्लू से बचाने के लिए सावधानी जरूरी
“घर से बाहर निकलते समय कान ढंके रखें। गर्म कपड़े जरूरी हैं। रात में बच्चों को लेकर बाहर नहीं निकलें, उन्हें ठंडी चीजें भी नहीं खिलाएं।”
-डॉ. शारजा फुलझेले, एचओडी पीडियाट्रिक अंबेडकर अस्पताल
डाक्टर कहें तो जांच जरूर करवा लें
“ठंड के कारण फ्लू के मरीज बढ़ गए हैं। इस सीजन में फ्लू व राइनो वायरस के अलावा नीमो कोकल व स्टेप्टो कोकस बैक्टीरिया सक्रिय रहते हैं।”
-डॉ. आरके पंडा, सदस्य कोरोना कोर कमेटी