Breaking News

धान की फसलों को माहो आदि बीमारियों से बचाने किसानों को सलाह

बेमेतरा | 15 अक्टूबर 2020-वर्तमान में जिले के अधिकांश क्षेत्रों में धान की फसल में माहो, फुदका, चितरी बंकी, पŸाी मोड़ आदि कीटों द्वारा नुकसान पहुंचाये जाने की जानकारी कृषकों द्वारा निरन्तर रूप से की जा रही है। लगातार बदलते मौसम एवं सही दवाई का प्रयोग नहीं करने से समस्या और भी विकट होते जा रही है। ऐसी अवस्था में जिले के कृषि विभाग द्वारा बताई गई दवाईयों का उपयोग करके आसान तरीके से कीटों पर नियंत्रण स्थापित किया जा सकता है।

उप संचालक कृषि एम.डी.मानकर ने बताया कि माहू, फुदका जैसे रस चूसने वाले कीटों के नियंत्रण के लिए डीनोटेफ्यूरान 20 प्रतिशत एस जी का 80-100 ग्राम मात्रा प्रति एकड़ जो कि बाजार में ओसीन, टोकन, सेनपाई, सिम्बोला आदि नामो से प्रचलित है, अथवा पायमट्रोजीन 50 फीसदी डब्ल्यू पी का 100 ग्राम मात्रा प्रति एकड़ जो कि चेस, सिमडा अथवा इमिडाक्लोप्रिड 40 से प्रतिशत से ज्यादा, इथीप्रोल 40 प्रतिशत डब्ल्यू जी जो कि बाजार में ग्लेमोर नाम से प्रचलित है, का 50-60 ग्राम प्रति एकड़ की दर से छिड़काव करें। छिड़काव खुले मौसम में दोपहर 2 बजे के बाद करें एवं खेतों से अधिक पानी निकाल देें। पŸाीमोड़ एवं तनाछेदक के नियंत्रण हेतु फिफ्रोनिल 5 प्रतिशत एससी 300-350 मि.ली. प्रति एकड़ प्रचलित नाम भीम, रिजेन्ट, फिपरो अथवा कन्टाफ हाइड्रोक्लोराइड 50 प्रतिशत एससी का 300-400 ग्राम प्रति एकड़ प्रचलित नाम कार्बो-50, करंट, क्रांति-50, कार्गो अथवा क्लोरेन्ड्रानिलिप्रोल 0.4 प्रतिशत जीआर (दानेदार) का 4 कि.ग्रा. प्रति एकड़ की दर से छिड़काव करें यह दवाई बाजार में फरटेरा नाम से प्रचलित है, अधिक जानकारी के लिए किसान भाई अपने ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी से जानकारी प्राप्त कर सकतें हैं।



About newscg9

newscg9

Check Also

कलेक्टर ने विशेष पिछड़ी जनजाति बैगा छात्रावास के बच्चों से चर्चा कर पढ़ाई और भोजन व्यवस्था की ली जानकारी एवं स्वामी आत्मानंद स्कूल का किया निरीक्षण

कलेक्टर जनमेजय महोबे ने लैब, ऑडिटोरियम, आईटी रूम, लाइब्रेरी, क्लासरूम, खेल मैदान, शौचालय की गुणवत्ता …