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कोरोना मरीजों की पहचान के लिए सिटी स्केन का प्रयोग किसी भी संस्था या शोध द्वारा प्रमाणित नहीं

इस संबंध में प्रकाशित खबरें भ्रामक

रायपुर | 08 सितम्बर 2020. वेब पोर्टल पर ‘‘संभलिए यदि ऐसा हुआ तो एन्टीजन एवं आरटीपीसीआर के नतीजे भी दे सकते हैं धोखा… अब ऐसे भी कराएं कोरोना टेस्ट” शीर्षक से प्रकाशित समाचार भ्रामक है। वैश्विक स्तर पर वैज्ञानिकों तथा भारत सरकार के आईसीएमआर द्वारा एन्टीजन किट, आरटीपीसीआर टेस्ट एवं टू स्टेप ट्रू-नाट विधि से कोविड-19 के मरीजों का जांच किया जाना निर्धारित किया गया है। वैज्ञानिक रूप से कोई भी स्क्रीनिंग टेस्ट शत-प्रतिशत सही (100% Sensitive & 100% Specific) नहीं हो सकता है। इसलिए कम लक्षण वाले कोविड पॉजिटिव मरीजों का निर्धारित टेस्ट में निगेटिव रिपोर्ट आना संभव है। चिकित्सक को क्लिनिकल पहचान एवं जांच करके भी उपचार प्रारंभ करना होता है।

सिटी स्केन का उपयोग गंभीर मरीजों की पहचान के लिए विशेषज्ञों से सलाह के बाद किया जा सकता है। लेकिन सिटी स्केन का प्रयोग कोरोना मरीजों की पहचान के लिए किया जाना किसी भी वैश्विक एवं भारतीय संस्था या शोध द्वारा प्रमाणित नहीं है। सिटी स्केन से जिन चिन्हों को पहचान कर इलाज किया जाता है, वह चिन्ह कोरोना के अलावा फेफड़ों की अन्य बीमारियों में भी पाए जाते हैं। सिटी स्केन के स्क्रीनिंग में उपयोग से रेडिएशन का खतरा कई गुना बढ़ जाता है जिसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। सिटी स्केन का उपयोग गंभीर मरीजों के चिकित्सकीय उपचार के दौरान विशेषज्ञों की सलाह के बाद किया जाना चाहिए, किन्तु यह कोरोना के लिए गोल्ड स्टैण्डर्ड/कन्फर्म टेस्ट नहीं हैं।

समाचार पत्रों, वेब पोर्टल और सोशल मीडिया में विशेषज्ञों के लेख से प्रभावित हो कर आम नागरिक सीधे सिटी स्केन, एक्स-रे सेंटर जैसी जगहों पर जा रहे हैं एवं जांच करा रहे हैं। यह उचित नहीं हैं। जिन्हे सिटी स्केन/एक्स-रे की आवश्यकता नहीं है, ऐसे लोग भी डायग्नोसिस सेंटर जाकर जांच करा रहे हैं। इससे अनावश्यक भीड़ एवं संक्रमण का खतरा बढ़ रहा हैं। सिटी स्केन का उपयोग विशेषज्ञों की सलाह से विशेष परिस्थितियों में किया जाना चाहिए। मरीज अनावश्यक रुप से रकम खर्च कर मंहगे टेस्ट करा रहे हैं। इससे उनकी आर्थिक स्थिति में अनावश्यक व्यय भार हो रहा है और इलाज का खर्च बढ़ रहा है।

यह जांच केवल गंभीर मरीज जिन्हें सांस लेने में तकलीफ या अन्य कोई गंभीर शारीरिक समस्या हो, उनके क्लिनिकल मूल्यांकन करने के लिए होता हैं, ताकि विशेषज्ञ मरीज का सही इलाज सही समय पर कर सकें। लेकिन आम लोग जिन्हें आवश्यकता नही हैं, वे भी जांच करा रहे हैं। अनावश्यक रूप से सिटी स्केन से शरीर में रेडिएशन का भी खतरा बढ़ता है। यह गर्भवती महिलाओं और बच्चों में किया जाना प्रतिबंधित है। इसके अनावश्यक उपयोग से रेडिएशन से होने वाले गंभीर परिणामों का खतरा बढ़ता है। सिटी स्केन सेंटरों में भीड़ बढ़ने से अन्य गंभीर मरीज जिन्हें सिटी स्केन की आवश्यकता है, उन्हें त्वरित सिटी स्केन उपलब्ध नहीं हो पा रही है। स्वास्थ्य विभाग लोगों से अपील करता है कि वे वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित टेस्ट के द्वारा ही कोरोना संक्रमण की जांच कराएं।



 

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