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प्रदेश के मुख्यमंत्री के द्वारा छत्तीसगढ़ राज्य को कृषि प्रधान राज्य विकसित करने के लिए नरवा-घुरवा बारी योजना सार्थक साबित हो रही है

बृजलाल अग्रवाल, वरिष्ठ पत्रकार की कलम से

घुरूवा योजना अर्थात जल संरक्षण एवं संवर्धन नदी नालों को 12 मासी बनाने का कार्य तेजी से चल रहा है ।

 

गाँव मे जन्म लिए पढ़े लिखे एवं बढ़े कृषि के धरातल से जुड़े मालगुजार के भूमि सुपुत्र भूपेश बघेल प्रदेश की बागडोर हाथ मे लेते ही कृषि को प्राथमिकता के आधार पर योजना तैयार कर पहली प्राथमिकता दी उन्होंने नरवा अर्थात नालों से जल संरक्षण एवं संवर्धन को इसी क्रम मे गरुवा से जुड़ी योजना घुरवा अर्थात गाय की गोबर से मकान के पास स्थित गड्ढा बनाकर उसमे गोबर पचाने इस गड्ढे मे गोबर के साथ इसमे घाँस कचरा साग सब्जी को अनावश्यक अंस छिलका पैरा भूँसा डालकर पानी डालने खाद बनाना एवं इससे जुड़ी बाड़ी अर्थात घर के पीछे खुली जमीन मे इस खाद का उपयोग कर दैनदीनी साग सब्जी का उत्पादन यह आवश्यकतानुसार स्वयं के उपयोग हेतु कुछ आय का भी साधन बना इस योजना के अतिरिक्त कुछ भी नहीं ये योजना देश मे अनेक शताब्दी से कृषक उपयोग कर कृषि करते आ रहे थे । कालांतर मे यह योजना देश मे विदेशी कम्पनिया प्रवेश कर रासायनिक उर्वरक से उत्पादन बढ़ाकर प्रदर्शन दिखाया फलस्वरूप उत्पादन तो बढ़ा है कृषि के मामले मे आत्म निर्भर तो हो गए किन्तु इस योजना के दुष्परिणाम को देखते हुए श्री बघेल ने गोबर खाद से वर्मी कंपोस्ट बनाने की विधि ढूंढ निकाली इस योजना को पुनर्जीवित करने गोधन न्याय योजना का प्रारंभ किया गया इसमे गोबर को 2/- प्रति किलो खरीद कर वर्मी कंपोस्ट को 10/- प्रति किलो की दर से विक्रय हेतु कृषकों को एवं सहकारी संस्था को मार्गदर्शन दिया जा रहा है । अब प्रदेश मे वर्मी कंपोस्ट बनने एवं विक्रय की शुरुवात हो गई है इस योजना से गाँव गरीब मजदूर एवं कृषकों की आर्थिक दशा सुधर रही है ।

योजना के प्रारंभ मे यंहा भाजपा ने गोबर खरीदी का मजाक भी उड़ाया किन्तु भाजपा समर्थित केन्द्रीय मंत्री श्री नितिन गढ़करी ने अब गोबर का अध्ययन कर गोबर मे प्रदूषण रहित पेन्ट बनाने प्रत्येक गाँव मे योजना लागू करने विभाग को निर्देश भी दे दिए । ज्ञातव्य हो कि देश के प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री पद पर आसीन होते ही देश मे लगातार रासायनिक खाद के बढ़ती खपत पर चिंता व्यक्त करते हुए यूरिया की 50 किलो की बोरी को 45 किलो करवा दिया एवं उसे नीम कोटेड अनिवार्य कर दिया जिससे यूरिया कि खपत मे कुछ कमी हुई । फसल की टॉप ड्रेसिंग मे गौ मूत्र 3 किलो 100 लीटर पानी मे मिलाकर स्प्रे करने से भी यूरिया कि खपत मे कमी होगी एवं अब जैविक खाद के उपयोग पर जोर दे रहे है अतः ऐसी स्थिति मे प्रदेश की गोधन न्याय योजना को पूरे देश मे योजना बद्ध ढंग से लागू करेंगे तो इससे रसायनिक खाद की खपत में कॉफी कमी होगी जिससे केंद्र सरकार द्वारा उर्वरकों को सबसीडी भी कम देनी पड़ेगी जिसे केंद्र सरकार गोधन न्याय योजना से बनाए जाने वाले वर्मी कंपोस्ट खाद मे दिए जाने वाले योजना को प्रोत्साहन मिलेगा देश के कृषक एवं गरीबों हेतु रोजगार के अवसर होंगे । फलस्वरूप स्वास्थवर्धक फसल प्राप्त होगी फसल मे कीटनाशक दवाईया का उपयोग कम होगा विदेशी मुद्रा बचत होगी पशुपालन को बढ़ावा मिलेगा इससे कृषकों को दोहरा फायदा तो होगा ही । गायो के बछड़े बैल बनकर खेती एवं गाड़ी के माध्यम से बिना किसी अतिरिक्त व्यय के छोटी मात्रा खाद्यान आदि समान लाने ले जाने हेतु एवं देशी हल से खेत जुताई का भी कार्य होगा जिससे कृषक ट्रैक्टर के हल्की जुताई से अच्छा मानकर देशी हल मे गहरी जुताई होगी एवं नमी के कारण अधिक अंकुरण निकलेगा पशुपालन मे कृषकों को कई अतिरिक्त व्यय नहीं करना पड़ेगा । चुकी पशुओ की कृषि उत्पादित फसल का अवशेष रवी धान व सब्जी के अतिशेष फसल भूसा पैरा आदि ही पर्याप्त होगा । गायों के दूध वृद्धि हेतु नियमानुसार पैरा को यूरिया द्वारा उपचारित कर भी जानवरों को खिलाया जा सकता है । इस हेतु कृषि विभाग से मार्गदर्शन लेना आवश्यक है वर्मी खाद बनाने मे 1 किलो केचुआ 10 टन खाद के लिए पर्याप्त है, इसी केचुए से खाद निर्माण मे काम आएंगे ।

वर्ष 1952 मे देश मे अकाल पड़ा था तब हमे अमेरिका से पीएल 480 के तहत सहायता के रूप मे माईलो ( लाल जूँवार ) मिली थी कालांतर मे खाद्यान के अभाव एवं बढती जनसंख्या का विदेशी कंपनियों ने लाभ उठाया एवं गाँव गाँव जा कर खेतों के फसल पर प्रदर्शन के सफल प्रयोग कर यंहा बहुत बड़ा बाजार बना लिया इसी दरमियान ब्रम्ह सम्राट स्वामी करपात्री जी महराज देश मे रासायनिक खाद के स्थान पर गाय के गोबर से बने खाद के उपयोग के लिए जन जागरण किया ।

वर्ष 1984 मे उनका आगमन कवर्धा हुआ तब धर्म सभा को उदभोदन करते हुए कहा “गाय बचेगी तो देश बचेगा” रासायनिक खाद से कृषि भूमि उत्तेजित होकर फसल अधिक होगी, किन्तु उर्वरा शक्ति नहीं बढ़ेगी ठीक उसी तरह जैसे घोड़े को चाबुक मारकर उत्तेजित तो कीया जा सकता है, किन्तु ताकत नहीं अतः गौ वंश के संरक्षण एवं संवर्धन से गाय का दूध भी मिलेगा परिवार बलिष्ठ होगा, गोबर खाद से जमीन उर्वरक होगी, एवं गायों के बछड़ों से जुताई एवं बैल गाड़ी मे छोटे मोटे कार्य भी किए जा सकेंगे । योग गुरु बाबा रामदेव ने पतंजलि के माध्यम से पूरे देश मे लाखों लीटर गौ मूत्र दवा के रूप मे, एवं शुद्ध घी प्रतिदिन विक्रय करा रहे है, ।

अब रासायनिक खाद के बाद विदेशियों ने फसल पर कीटनाशक दवाईयों से होने वाली प्रति वर्ष करोड़ों टन खाद्यान नुकसान होने पर प्रचार कर प्रथम स्पर्शविष, एवं पश्चात आंतरिक विष एवं धूम्रविष इसके पश्चात भूमि पर उगने वाले खरपतवार गलाईफोसेल दवाईयों का जबरदस्त बाजार बना लिया और अब फलों को जल्दी पकाने हेतु 5% कीटनाशक दवाओ का बाजार बना लिया जिसके दुष्परिणाम सर्वाधिक पंजाब मे देखने को मिलता है, एवं वहा कैंसर ट्रेन ही चल रही है, देर आयद दुरुष्त आयद अब हम जैविक खाद की ओर तेजी से आगे बढ़ रहे है ।

इसी तारतम्य गोबर से वर्मी कंपोस्ट खाद बनाने मे सफल होते दिखाई दे रहे है, जिससे देश के लाखों किसानों को कृषि भूमि सुधरेगी एवं लोगों को रोजगार मिलेगा अत्यंत सरल प्रणाली एवं अच्छे परिणाम आने से दिनों दिन इसकी  लोकप्रियता बढ़ती जा रही है । इसके अतिरिक्त अब गोबर से अगरबत्ती, राखिया, एवं दीप भी बनाने के कार्य तेजी पर है । आने वाले वर्षों मे शीघ्र ही आश्चर्यजनक परिणाम मिलेंगे चुकी यह योजना सस्ती सर्वशुलभ एवं आसान है ।

घुरूवा योजना अर्थात जल संरक्षण एवं संवर्धन नदी नालों को 12 मासी बनाने का कार्य तेजी से चल रहा है ।

प्रदेश की प्रथम नरवा योजना दुर्ग जिले के पाटन विकासखण्ड के गजरा वाटरशेड प्रोजेक्ट मे सफल प्रयोग पर यूरोप एवं अफ्रीका देशों मे उत्साह बढ़ा एवं युगाण्डा के जल शक्ति सलाहकार ने यंहा प्रदेश के सलाहकार को मेल कर तकनीकी सहायता हेतु मांग की अनुरोध की है । उक्त ग्राम की इस सफल गजरा वाटरशेड का वीडियो इंटरनेट मे दिखाया गया था । अतः इस योजना को सुखाग्रस्त भागों मे भी कार्यान्वित किया जा सकता है, इसी प्रकार प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री अजित जोगी ने डबरी योजना शुरू कारवाई थी, किन्तु वह योजना हितग्राहियों एवं संबंधित अधिकारियों के मेल-मिलाप के कारण भ्रष्टाचार की गोद मे चली गई एवं परिणाम शून्य रहा अतः नरवा योजना मे भी संलग्न अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाए एवं इसमे कुताही बरतने वाले लोगों पर जावबदेही एवं दंडात्मक कार्यवाही की आवश्यकता है ।

देश विदेश से प्राप्त लगातार भूजल स्तर की गिरावट पर अध्ययन किया जाए तो वर्षा का जल रोकने हेतु इससे अच्छी योजना हो ही नहीं सकती । हमारे पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी ने अपने पूर्व कार्यकाल मे पूरे देश मे प्रति वर्ष सूखे एवं बाढ़ को देखते हुए देश के समस्त नदी नालों को जोड़ने के लिए योजना बनाई थी, तब यह योजना 70 हजार करोड़ की थी आज भी देश उसी प्राकृतिक प्रकोप से गुजर रहा है । अतः देश के वर्तमान प्रधान मंत्री को इस योजना को पूर्ण करने से अटल जी का एक सपना साकार होगा एवं देशवासियों को राहत मिलेगी चुकी मोदी जी है तो मुमकिन नही है ।

 



 

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