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हाथ पीले होने से पहले दो नाबालिक बच्चियों का बाल विवाह रोकवाया गया

बेमेतरा | 23 जून 2020ः-बेमेतरा जिले के नगर पंचायत देवकार के एक वार्ड मे  एक परिवार मे दोें नाबालिग बालिकाओ का विवाह किये जाने की सूचना पर जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी सह बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारी रमाकांत चंद्राकर के निर्देश पर जिला बाल संरक्षण अधिकारी व्योम श्रीवास्तव के मार्गदर्शन में विभाग की पर्यवेक्षक श्रीमती मानेश्वरी कुर्रे, सुरेन्द्र साहू, सामाजिक कार्यकर्ता आनंद धृतलहरे चाईल्ड लाईन बेमेतरा से शैलेजा गेण्डेª, पुलिस विभाग से चैकी देवकर के सहायक निरीक्षक,एम.एल.चावले व कांस्टेबल एवं आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, स्थानीय जनप्रतिनिधि व प्रबुद्ध नागरीको की सहायता से उन बालिकाओ के निवास स्थान पर पहुॅची, उक्त विवाह स्थल पर ग्राम मोहगांव जिला कबीरधाम तथा ग्राम कोहडीया जिला कबीरधाम से बारात 25 जून को आने वाली थी । वधु पक्ष को सझाईश दी गई जिस पर उनके द्वारा सहर्ष ही बालिका के 18 वर्ष पूर्ण होने के उपरांत ही विवाह किये जाने हेतु अपनी सहमति प्रदान की तथा विवाह स्थगित करने की बात कही गई, बालिका के परिजनों के अनुसार हमें यह ज्ञात नहीं था कि 18 वर्ष से कम आयु की बालिका एवं 21 वर्ष से कम आयु के बालक का विवाह गैर कानूनी है।

अधिकारियों द्वारा समझाईस दिये जाने पर उन्होने उक्त बालिका का विवाह 18 वर्ष के उपरांत किये जाने की शपथपूर्वक कथन किया। बालिका व परिजनों को बालक कल्याण समिति, बेमेतरा में समझाईस हेतु बुलाया गया है तथा उन्हे बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 में उल्लेखित प्रावधानों के बारे में बताया गया कि 18 वर्ष से कम आयु की बालिका व 21 वर्ष से कम आयु का बालक का विवाह करना या करवाना अपराध है, जो भी व्यक्ति ऐसा करता या कराता है या विवाह में सहयोग प्रदान करता है,तो उसे भी 02 वर्ष तक कठोर कारावास अथवा जुर्माना जो कि 1 लाख रू. तक हो सकता है अथवा दोनो से दण्डित किया जा सकता है।



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